क्या मालूम हो गया तुम्हें
मैंने फिर से, अपना मोबाइल खो दिया है
कोइ नई बात नहीं है ना
मैंने फिर से, एक नया सिम लिया है
अब नया हेंडसेट खरीदने के लिए
जेब में पैसे नहीं हैं
दो मिनट के लिए कोइ उधार भी नहीं देता
मेरे दोस्त, तुम्हारे जैसे नहीं हैं
खैर, साइबर कैफे जाकर
facebook से तुम्हारा नंबर लिया
पुरानी ATM स्लिप के पीछे लिखकर
वापस wallet में संभाल दिया
पूरे रास्ते मैं ढूंढता रहा
बड़ी मुश्किल से वो पुराना बोर्ड दिखा
इन्टरनेट, फैक्स, फोटो-स्टेट के नीचे
एक कोने में था PCO लिखा
पहले से ही निकाल कर वो पर्ची
जल्दी से उस दुकान में घुसा
टेलीफोन की बाबत पूछने पर
system पर गेम खेलता अधेड़ बड़ी जोर हंसा
मोबाइल के ज़माने में ढूँढ़ते हैं पब्लिक बूथ
देश-दुनिया तो गर्त में ही जाएगी
अब भी कितना पीछे है हमारा यूथ
हंसी के रुकने या शायद गेम-ओवर होने से
उनको मेरी बेचैनी का एहसास हुआ
अरे! कोई बहुत ज़रूरी बात है तो
मेरे फोन से ही ट्राई करो ना, बुआ!!
कुछ और सोचे बिना ही मैंने
उनके हाथ को लपक लिया
चश्मे के नीचे कुछ रुका हुआ था
चुपके स्क्रीन पर टपक लिया
पोंछ कर सीने से, पर्ची खोलकर
मैं तुम्हारा नंबर डायल करने लगा
इससे पहले की कॉल कनेक्ट होती
कोई इनकमिंग का सिग्नल लगने लगा
'हमरा हऊ चाही' की tune में
हमारी लोकल संस्कृति बजने लगी
हथेली खोल दी मैंने
'मुन्नी' उँगलियों ही लिपटने लगी
अंकलजी टोन सुनते ही
काउंटर छोड़ कर झपटे
तुम अपना जरूरी कॉल बाद में कर लेना
पहले हम अपनी 'शीला' से निपटें
ऑन करते ही उनकी आवाज
गरम शीशे सी पिघल गयी
मैंने अभी तक मेहंदी नहीं लगाई
सावन की आखिरी तारीख भी निकल गयी
इतने में वो दबंग अपनी privacy बचाते हुए
बाहर गली में निकल लिए
फोन फंसा लिया कंधे और गर्दन के बीच
पड़ोस की दीवार पर शंका निवृत हो लिए
वापस लौट कर आते ही
वोही आवाज़, वही दम था
जल्दी अपनी बात ख़तम करो
हमारे पास वक़्त ज़रा कम था
इस बीच मैंने वो नंबर इतनी बार पढ़ा
की शुरू से आखिर सब याद हो गया
कई बेल्स के बाद भी रिस्पोंस नहीं आया
सारा talk-time भी बर्बाद हो गया
अब, ध्यान गया
तुम तो अपने क्लास में होगी
मैं तो यूँही आम बातें करता रहा हूँ
तुम्हारी दिलचस्पी तो किसी ख़ास में होगी
चलो इतना वक़्त बर्बाद कर ही दिया
तो ये भी बता दूँ
मैं कोई गली, रास्ते, मकान भूलता ही नहीं हूँ
अब तुम ही कहो मैं अपना कौन-सा पता दूँ।।।।।