Sunday, 10 March 2013

रात --------



बत्ती जल रही है?
मतलब?
बुझा दो प्लीज
तुम्हें उजाले से इतनी घबराहट क्यूं होती है 
मेरे दांत बहुत पैने हैं 
काटने की जरूरत तो सभी को पड़ती है?
उनमें कभी-कभी खून लगा होता है 
मेरी नाक बहुत तेज़ है 
मुझे सलवटों से तकलीफ है 
तो तुम नींद में बोलते हो?
मैं तुमसे प्यार करता हूँ।।

Friday, 8 March 2013

आज

मेरी डायरी में 
उतने ही बार मैंने शब्द लिखे 
जितनी बार मैं तुमसे सच कहना चाहता था 
ना तुमने कभी गिनती की 
और ना ही मैंने कविताएँ लिखीं 

बस, कुछ शब्द 
जमा करता रहा असफलताओं के खाते में 
ताकी खर्च कर सकूँ व्यस्तता 

ये सब जमाखोरी कल के लिए ही तो थी 
कल, जब तुम गिन पाओगी अपनी उलझी हुई लटों को 

लेकिन उस आनेवाले कल के लिए 
आज का बीत जाना जरूरी था 

आज ने मांग लिए हैं मेरे शब्द उधार 
और मैं मना नहीं कर पाया 
क्यूंकि मैं आज से प्रेम करता था

Monday, 28 January 2013

(आवेदन-पत्र)

आदरणीय सम्पादक महोदय,
सविनय नम्र निवेदन है 
की मैं बेमतलब वाह-वाही और 
बधाईयों से बीमार हो गया हूँ
लॉबीइंग का बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा 
आपकी बाजारवादी और बासी टिप्पणियाँ 
सर का दर्द बर्दाश्त से बढ़ा देती हैं 
विचारधारा की खिड़की पर बैठा हुआ 
भगा रहा हूँ मक्खियाँ
और वर्तनी दोषों को खुजा रहा हूँ
डॉक्टरों (आलोचकों) की सलाह से ज्ञात हुआ है
यह इस दौर की सबसे भयानक(संक्रामक) बीमारी है
हालांकि पहले उन्होंने ही आपके पास रेफर किया था
लेकिन अब वो भी इसे लाइलाज बता रहे हैं
अतः, श्रीमान से निवेदन है
साहित्यगिरी की आपकी कक्षाओं से
अनुपस्थित रहने की अनुमति प्रदान करें
आपका आज्ञाकारी
अनिच्छित कवि।।।

Saturday, 26 January 2013

...मैं लड़का बनूँगा।।।




एक बच्चा रोता है खिलौने के लिए 
आपके पास पैसे नहीं हैं उस मतलब के 
बच्चा और जोर से रोता है 
आपके पास समय नहीं है उसे समझाने को 
आप मन ही मन जोड़ रहे हैं खरीदे गए सामानों का बिल 
अब बच्चा सुबक रहा है गाल पर अपने बचपने की रसीद लेकर 
और आप बहस रहे हैं फ्री पार्किंग के पुराने ऑफर के लिए 
बच्चा फिर भी टिका है अपने रोने की  जिद पर 
और लटक रहा है आपके पहलू में परजीवी की तरह 
आप पीस रहे हैं दांत आस-पास के बच्चों की अच्छी परवरिश पर 
गाड़ी में वापस बैठते ही उतर गयी बच्चे की जिद 
और साथ ही बढ़ गई आपके गुस्से की रफ़्तार 
पहुँचते ही घर बच्चा पहुँचा अपने उसी कोने में 
जहां उसके होने की सजा मुक़र्रर करते हैं आप 
लेकिन आज, कल से अलग है 
आप बच्चे की वेल बीइंग को लेकर सजग हैं 
आप लगा देते हैं उसको हलकी सी चपत 
और देते हैं जीने का सबसे बड़ा सबक 
बेटा- तुम क्यूँ लड़किओं की तरह रोते हो?
और बच्चा खाता है भगवान की कसम 
अब कभी नहीं रोऊंगा मैं।।। लड़का बनूँगा मैं।।। 

Thursday, 24 January 2013

..लिखना।।


तुम प्रेम करते हो 
मैं भी प्रेम करता हूँ 
हम सभी प्रेम करते हैं 
इस प्रमेय को सिद्ध करने के लिए शब्द नहीं मिलते 

उतारते हुए शब्दों को कपड़ों की तरह 
हम सहम जाते आसपास के उजालों से 
अँधेरा हमेशा इतना बुरा नहीं होता 

तुम्हें पढ़ते हुए भर जाता हूँ और 
खाली कर देता हूँ आत्मग्लानि का गिलास 
छिः !! कितनी बुरी आदत है लिखना 

शर्म

क्या आपको कभी शर्म आती है 
तो फिर आप नंगे क्यूँ नहीं हो जाते 
क्या बखेड़े से जी घबराता है 
आप नामर्द क्यूँ नहीं हो जाते 
क्या आप अक्षरों को पहचानते 
चारों ओर बिखरा हुआ दर्द क्यूँ नहीं लिख पाते 
क्या आप सिगरेट पीते हैं 
सरकारी लाशों से उठता हुआ धुंआ 
क्यूँ नहीं गटक जाते 
क्या आप चल पाते हैं 
आपके ख़याल, बेखयाली तक क्यूँ नहीं पहुँच पाते 
क्या आप लड़ाते हैं 
खुद को खुद से लड़ना क्यूँ नहीं सिखाते 
क्या आप पीते हैं 
गरीबों को अपमान पीना क्यूँ नहीं सिखाते 
क्या आप गन्दगी फैलाते हैं 
बेचारी आवाम को इंक़लाब क्यूँ नहीं बताते।