महाराज!
धन्य हैं आप
नतमस्तक हूँ आपके आशीर्वाद पर
मुझे भी मुफ्त में सलाह नहीं बाँटनी चाहिए
आपके चरण-कमल कहाँ हैं
मैं भी अर्पित करना चाहता हूँ
कुछ हारी हुई कविताएँ
प्रभु!
आदर स्वीकार करें
भाषा और संस्कृति प्रेम बचाए रखने में
समस्त क्रियाओं का भ्रूण-परिचय करने में
अनगिनत प्रतिभाओं के गर्भ-पतन करवाने हेतु
आपने अदम्य साहस का परिचय दिया है
देव!
एक और आग्रह सुन लें
सुसंस्कृत से प्रतीत होते जिस बालक पर आप आसक्त हैं
अपनी मुट्ठी में उसने नमक बाँध रखा है
हे घोघरदेव!
शीघ्र ही आपको प्रगति की दीवार छोडनी पड़ेगी
और बाल-सुलभ कौतूहलों से जूझना पड़ेगा