मुआवज़े चुकता नहीं होंगे
ताउम्र
हिसाब हमेशा चलता रहेगा..
यादों का
जो भी मुस्कुराहटें
वजूदों ने खरीदीं-बेचीं
लम्हों-ज़र्रों की कलम से दर्ज रहेंगीं
रंग-बरंगे
glitter पेन से लिखे कार्ड
और हंसता हुआ-सा बौड़म खरगोश
अहम्कानी फितूरों की वो रातें
बालकनी में छुपी चाँद से मुलाकातें
संभाल कर रखता चला हूँ
अपने wallet की छिपी हुई जेब में
कोई तस्वीर...
या लड़कपने की खुश्बुनुमाँ चिट्ठियों की तरह..
तुम कहो तो सही..
ज़ज्बातों को परे ही रख दूँ लिखते हुए
ज़रा सोचना गर
तुम्हें पढ़ते हुए ख़याल आ जाए
ज़न्नत को ज़मीन पर उतार लेना
चंद लफ्ज़
आवारा तसव्वुर से उधार लेना
खुश रहना
क्यूंकि मायूसी
हारनेवालों की महबूबा है
आज फिर निकला है आफ़ताब
जलने की आफ़त सर लिए
कल ना जाने थककर
किस छोर पर डूबा है........
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