कोयल की चाची ने उससे कहा था
वो किसी कोव्वे की बेटी थी
पूरी जिंदगी ना नहाने की कसम खा ली
सुरीला गाती रही.....
लेकिन रंगत उसकी काली की काली रही
सिर्फ एक ही मौसम में गाने की आज़ादी
उसने अपने अंडे भी
कौव्वों के घोंसलों में रखने शुरू कर दिए
साल गुजरते रहे
नए परिंदे उड़ना-गाना सीखते रहे
और
अपने पूर्वजों के बताए रास्ते पर चलते रहे
कौव्वों को
चालबाजियों का पता चला
जम कर क़त्ल-ए-आम हुए..
थोड़े-थोड़े ही बचे
कोयल और कौव्वों में अब भी बहस जारी है..
क्या जरूरी नहीं
प्रगति को रोक कर
कुछ पुरानी नीवों की मरम्मत की जाए??
वो किसी कोव्वे की बेटी थी
पूरी जिंदगी ना नहाने की कसम खा ली
सुरीला गाती रही.....
लेकिन रंगत उसकी काली की काली रही
सिर्फ एक ही मौसम में गाने की आज़ादी
उसने अपने अंडे भी
कौव्वों के घोंसलों में रखने शुरू कर दिए
साल गुजरते रहे
नए परिंदे उड़ना-गाना सीखते रहे
और
अपने पूर्वजों के बताए रास्ते पर चलते रहे
कौव्वों को
चालबाजियों का पता चला
जम कर क़त्ल-ए-आम हुए..
थोड़े-थोड़े ही बचे
कोयल और कौव्वों में अब भी बहस जारी है..
क्या जरूरी नहीं
प्रगति को रोक कर
कुछ पुरानी नीवों की मरम्मत की जाए??
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