जब हम अजनबियों से मिलते हैं
अजीब लापरवाह-ए-अंजाम सफ़र पर चल पड़ते हैं
उमर के किसी भी मोड़ पर खड़े हों हम
दिमाग बच्चा हो जाता है
दिल के खिलौने को खेलते-खेलते
फिर से तोड़ देने को बेताब हुई जातीं
हथेलियाँ, खुशनुमा बेमतलब इत्तेफाक बर्गलाते हैं
अख्लाक़- हमारे सितारे आपस में कितने मिलते हैं
देखो ना- हमदोनों साथ कितना खिलते हैं
जबरन पैदा करते हैं माज़ी आँखों में
आंसू, हसीं रुखसारों पर बिलकुल भी नहीं जमते हैं
आओ चलो तुम्हें भी दिला लाऊं
तुम बस अपनी पसंद बताओ
हमने देखे हैं बाज़ार जहां ख्वाब भी बिकते हैं
जब हम फिर से तनहा रास्तों लौटते हैं
उम्मीदों की लाश अपने ही काँधे और श्मशान ढूंढते हैं
सारे सफ़र में जलती हुई रूहें मिलीं
आगोश में खला की आग के तमाम
हमकदम, हमसाया होने की जिद में अड़े जलते हैं
याद तलवों के ज़ख्मों पर तरसतीं
हौसलों के अश्क़ कातिल लबों बरसतीं
साँसे, लम्हें अब भी कतल होने का दम भरते हैं
अभी लंबा है सफ़र कोई अजनबी
लीकों पर अपने हक़ से करते दिल्लगी
राहगुजर, मंजिलों के मिल जाने से ही डरते हैं.....
अजीब लापरवाह-ए-अंजाम सफ़र पर चल पड़ते हैं
उमर के किसी भी मोड़ पर खड़े हों हम
दिमाग बच्चा हो जाता है
दिल के खिलौने को खेलते-खेलते
फिर से तोड़ देने को बेताब हुई जातीं
हथेलियाँ, खुशनुमा बेमतलब इत्तेफाक बर्गलाते हैं
अख्लाक़- हमारे सितारे आपस में कितने मिलते हैं
देखो ना- हमदोनों साथ कितना खिलते हैं
जबरन पैदा करते हैं माज़ी आँखों में
आंसू, हसीं रुखसारों पर बिलकुल भी नहीं जमते हैं
आओ चलो तुम्हें भी दिला लाऊं
तुम बस अपनी पसंद बताओ
हमने देखे हैं बाज़ार जहां ख्वाब भी बिकते हैं
जब हम फिर से तनहा रास्तों लौटते हैं
उम्मीदों की लाश अपने ही काँधे और श्मशान ढूंढते हैं
सारे सफ़र में जलती हुई रूहें मिलीं
आगोश में खला की आग के तमाम
हमकदम, हमसाया होने की जिद में अड़े जलते हैं
याद तलवों के ज़ख्मों पर तरसतीं
हौसलों के अश्क़ कातिल लबों बरसतीं
साँसे, लम्हें अब भी कतल होने का दम भरते हैं
अभी लंबा है सफ़र कोई अजनबी
लीकों पर अपने हक़ से करते दिल्लगी
राहगुजर, मंजिलों के मिल जाने से ही डरते हैं.....
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