Saturday, 16 June 2012

तुम्हारे नाम........

आज की शाम फिर से तुम्हारे नाम लिख दूँ 
याद आया फिरसे कोई जरूरी काम लिख दूँ 

ख़ास हो सके ज़ज्बा 
कैद करूँ लफ़्ज़ों को आम लिख दूँ 
हसीं पलकों उम्मिद्जुदा 
जिल्द-ख़्वाबों के दाम लिख दूँ 

कुछ धोखा ही सही खला के होठों
तसव्वुर का खाली जाम रख दूँ 
इक पल को भी जो लौटे काफ़िर हवा 
गिरवी मैं सारे मौसमों के घर बाम रख दूँ..................

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