कई दिनों से आईना मुझे पहचानता नहीं
कई दिनों से कोई दोस्त मुझसे मिला नहीं
कई दिनों से फ़क़त उम्मीदों के कांटे सूखते रहे
कई दिनों से फूल हिम्मत का शाखों पर खिला नहीं
कई दिनों से हरुफें रूठीं रहीं हैं अशआरों से
कई दिनों से एक उम्दा शे'र भी सुना नहीं
कई दिनों से तसव्वुर, माज़ी संदूक-ताले में बंद है
कई दिनों से इल्म-ए-शायरी, करामात किया नहीं
कई दिनों से डायरी में कुछ लिखा नहीं
कई दिनों से चाँद भी खिड़की में दिखा नहीं
कई दिनों से रात ने कपड़े नहीं बदले
कई दिनों से दिन भी दफ्तर में टिका नहीं
कई दिनों से हवाएं लिपटती नहीं सज़र से
कई दिनों से क़तरा-ए-अश्क पत्ता धुला नहीं
कई दिनों से आवारा नज़रों में खूबसूरती कैद रही
कई दिनों से वाइज़ की नाउम्मीदी का गिला नहीं...................
कई दिनों से कोई दोस्त मुझसे मिला नहीं
कई दिनों से फ़क़त उम्मीदों के कांटे सूखते रहे
कई दिनों से फूल हिम्मत का शाखों पर खिला नहीं
कई दिनों से हरुफें रूठीं रहीं हैं अशआरों से
कई दिनों से एक उम्दा शे'र भी सुना नहीं
कई दिनों से तसव्वुर, माज़ी संदूक-ताले में बंद है
कई दिनों से इल्म-ए-शायरी, करामात किया नहीं
कई दिनों से डायरी में कुछ लिखा नहीं
कई दिनों से चाँद भी खिड़की में दिखा नहीं
कई दिनों से रात ने कपड़े नहीं बदले
कई दिनों से दिन भी दफ्तर में टिका नहीं
कई दिनों से हवाएं लिपटती नहीं सज़र से
कई दिनों से क़तरा-ए-अश्क पत्ता धुला नहीं
कई दिनों से आवारा नज़रों में खूबसूरती कैद रही
कई दिनों से वाइज़ की नाउम्मीदी का गिला नहीं...................
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