हम आज भी उसी मोड़ पर बैठे हैं
इक बार ज़रा मुड़कर देखो..
तेरे पहलु में समा जाने के
आसार अभी तक जिंदा हैं
दो-चार कदम चलकर देखो..
तेरी आँखों से बहता पानी
उसी दरया में डूबें, मर जाएँ
अपनेआप से हम कितने शर्मिंदा हैं
तुम आज ज़रा छूकर देखो..
तेरी तस्वीर..
नहीं, कोई तकलीफ नहीं.....
मेरी बिस्तर के निचे दबाकर
यादों का पुलिंदा रखा है..
इक रात ज़रा झुककर देखो...
ये बेमतलबी तरन्नुम,
ये उलटी-पुल्टी बातें
वाइज़ को जाया लगती होंगीं.
ये ज़ज्बात कितने चुनिन्दा हैं
इक बार महसूस कर देखो.......
इक बार ज़रा मुड़कर देखो..
तेरे पहलु में समा जाने के
आसार अभी तक जिंदा हैं
दो-चार कदम चलकर देखो..
तेरी आँखों से बहता पानी
उसी दरया में डूबें, मर जाएँ
अपनेआप से हम कितने शर्मिंदा हैं
तुम आज ज़रा छूकर देखो..
तेरी तस्वीर..
नहीं, कोई तकलीफ नहीं.....
मेरी बिस्तर के निचे दबाकर
यादों का पुलिंदा रखा है..
इक रात ज़रा झुककर देखो...
ये बेमतलबी तरन्नुम,
ये उलटी-पुल्टी बातें
वाइज़ को जाया लगती होंगीं.
ये ज़ज्बात कितने चुनिन्दा हैं
इक बार महसूस कर देखो.......
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