Saturday, 16 June 2012

खूबसूरती।..

इक तस्वीर खुली सामने
मुसव्विर खद खुदा रहा होगा 
झूमती लटों के सहारे, आज 
यहीं, ज़न्नत ज़मीं पर उतर रही

संभलते हैं ज़ज्बात 
अनछुए नाज़ुक हाथों को थाम 
ख्वाहिशों का क्या है, फासला 
दूर, दरया-ए-अश्क़ पर सिफ़र रही 

बहुत हल्की-सी मुस्कुराहट
जैसे कोई कमसिन शरारत
तारीफ़ भूल गयी सब, इशारे
सूफी, खूबसूरती चेहरे पर बेउमर रही

गुम गईं हसरतें हासिल की
सर्द हवा से बयाँ कोई हुस्न
फलक भी छोटा रहा, चितवन
आड़े, बेजा हालात लम्हों पर खुशतर रही..........




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