Saturday, 16 June 2012

ख़ुमारी

ख़ुमारी नींद भर 
खला के दामन में 
शर्मा के रात कोई, 
जूनून-ए-जानशीं 
शर्मिंदा करवट पले 

सहम जाए ख़ामोशी 
तेज़ साँसों तले 
उनींदी उमर लिए, 
इल्म-ए-खूबसूरती,
आवारा निगाहें बहें

लम्हों की गर्दन
गेसू लिपटती हुई यादें
पलकों पर आब-ए-हयात,
तिश्नगी का वजूद मिटाने
कमसिन रास्ते हरक़त करें

सुबह बड़ी शदीद
बेतरतीब बरसी वफायें
शब्-ए-फुरक़त तनहा शबनम
थकती बूंदो को भी
टपकने की फ़ुर्सत मिले

खूबसूरत माजी,
कुछ बेशकीमती नज्में
इश्क-ए-आवारा,
कोई ख़ाक-सी बरक़त मिले.........

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